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शेयर बाजार में गिरावट के साथ हफ्ते का आखिरी कारोबारी दिन बंद, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान पर

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हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान पर बंद हुए। आरबीआई की मौद्रिक नीति और महंगाई अनुमान में बदलाव का बाजार पर असर देखा गया।

हफ्ते के अंतिम कारोबारी सत्र में घरेलू शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच अंततः गिरावट देखने को मिली और प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान पर बंद हुए। पूरे दिन बाजार में निवेशकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी रही, जिसका मुख्य कारण भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के हालिया फैसले और वैश्विक आर्थिक संकेतों से जुड़ी अनिश्चितता रही।

कारोबार की शुरुआत हल्की मजबूती के साथ हुई थी, लेकिन दिन चढ़ने के साथ बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बढ़ता गया। निवेशक किसी स्पष्ट दिशा के अभाव में खरीद और बिक्री के बीच उलझे रहे, जिससे बाजार में अस्थिरता बनी रही। अंत में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 116.67 अंक यानी 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,243.34 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं 38 शेयरों वाला निफ्टी 49.85 अंक यानी 0.21 प्रतिशत टूटकर 23,366.70 के स्तर पर बंद हुआ।

BSE Sensex और Nifty 50 दोनों में आई यह गिरावट मुख्य रूप से आरबीआई के नीतिगत निर्णयों के बाद देखने को मिली। निवेशकों की नजर पहले से ही इस बैठक पर टिकी हुई थी, और जैसे ही मौद्रिक नीति के नतीजे सामने आए, बाजार की धारणा प्रभावित हो गई।

Reserve Bank of India के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की कि मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है। साथ ही नीति रुख को 'तटस्थ' बनाए रखा गया है, जिससे संकेत मिलता है कि फिलहाल ब्याज दरों में किसी बदलाव की संभावना नहीं है।

हालांकि दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ, लेकिन बाजार की चिंता तब बढ़ गई जब आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया। इस संशोधन ने निवेशकों के बीच यह आशंका पैदा कर दी कि आने वाले समय में महंगाई दबाव में रह सकती है, जिससे कॉरपोरेट मुनाफे और आर्थिक विकास पर असर पड़ सकता है।

दिनभर के कारोबार में सेक्टरवार प्रदर्शन भी मिला-जुला रहा। कुछ प्रमुख शेयरों पर दबाव देखा गया, जिनमें विप्रो और हिंडाल्को लगभग तीन-तीन प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। वहीं दूसरी ओर कुछ चुनिंदा शेयरों में हल्की खरीदारी देखने को मिली, लेकिन वह बाजार की समग्र कमजोरी को संतुलित नहीं कर सकी।

विदेशी मुद्रा बाजार में भी हलचल रही। आरबीआई फैसलों के बाद भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 79 पैसे मजबूत होकर 94.95 (अस्थायी) पर बंद हुआ। मुद्रा बाजार में यह मजबूती घरेलू स्थिरता और वैश्विक संकेतों के मिश्रित प्रभाव का परिणाम मानी जा रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान में बाजार पर वैश्विक अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और केंद्रीय बैंकों की नीतिगत दिशा का प्रभाव साफ दिखाई दे रहा है। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं।

आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेश प्रवाह और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। जब तक स्पष्ट सकारात्मक संकेत नहीं मिलते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

कुल मिलाकर यह कारोबारी दिन बाजार के लिए मिश्रित संकेत लेकर आया, जहां नीति स्थिरता तो रही लेकिन महंगाई अनुमान में वृद्धि ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।

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